छमछम छमछम बरखा बरसे
मेघा बरसे मन ये तरसे
सावन कि ये बरखा रानी
सुरमयी गीत सुनाती है
रात सुहानी दिन मतवाली
हर -मन रस भर जाती है
सन-सन करते पवन के झोंके
पत्तो से टकराती है
झूम- झूम कर नृत्य करते
मधुर गीत ये गाते है
चंचल-कोमल तने तुम्हारे
डाल- डाल पंछी गुनगुनाते है
पर पड़ते ही झंझावात
शंकित- चकित छुप जाते है
राग ये कुछ ऐसा छेडे़
तरूवर मंद मुस्काते है
नभचर झूमे, जलचर कूदे
मत्स्य गोता खाते है
छमछम छमछम बरखा बरसे
मेघा बरसे मन ये तरसे