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वर्षा -एक मधुर गीत

                
                                                         
                            छमछम छमछम बरखा बरसे
                                                                 
                            
मेघा बरसे मन ये तरसे

सावन कि ये बरखा रानी
सुरमयी गीत सुनाती है
रात सुहानी दिन मतवाली
हर -मन रस भर जाती है

सन-सन करते पवन के झोंके
पत्तो से टकराती है
झूम- झूम कर नृत्य करते
मधुर गीत ये गाते है

चंचल-कोमल तने तुम्हारे
डाल- डाल पंछी गुनगुनाते है
पर पड़ते ही झंझावात
शंकित- चकित छुप जाते है

राग ये कुछ ऐसा छेडे़
तरूवर मंद मुस्काते है
नभचर झूमे, जलचर कूदे
मत्स्य गोता खाते है

छमछम छमछम बरखा बरसे
मेघा बरसे मन ये तरसे
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4 वर्ष पहले

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