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माँ-बाप के क़दमों में जन्नत

Motiur Rahman

Mere Alfaz
                                    
                                                                        
                            जिनको मोहब्बत से देखने में है हज्जे मक़बूल का सवाब,
        
                                                    
                            
उनके हाथों का बोसा और तलवों को चूमने का सवाब क्या होगा।

माँ-बाप के कदमों पे निसार हो जा,
अरे कुर्बान हो जा,
फिर मत पूछ कि तेरा मक़ाम, तेरा मर्तबा क्या होगा।

ख़बरदार, ख़बरदार!
उनके चेहरे को कभी ग़ुस्से से मत देखना,
अरे जिसके तलवों के नीचे है जन्नत,
उसके सर का मक़ाम क्या होगा।

जो भागकर रिश्ते बनाते हैं,
देखे हैं कहीं टूटते हुए मैंने,
सुनो, जो अपने माँ-बाप का वफ़ादार न हुआ,
वो तेरा क्या होगा।
- मोतीउर रहमान
4 घंटे पहले
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