जिनको मोहब्बत से देखने में है हज्जे मक़बूल का सवाब,
उनके हाथों का बोसा और तलवों को चूमने का सवाब क्या होगा।
माँ-बाप के कदमों पे निसार हो जा,
अरे कुर्बान हो जा,
फिर मत पूछ कि तेरा मक़ाम, तेरा मर्तबा क्या होगा।
ख़बरदार, ख़बरदार!
उनके चेहरे को कभी ग़ुस्से से मत देखना,
अरे जिसके तलवों के नीचे है जन्नत,
उसके सर का मक़ाम क्या होगा।
जो भागकर रिश्ते बनाते हैं,
देखे हैं कहीं टूटते हुए मैंने,
सुनो, जो अपने माँ-बाप का वफ़ादार न हुआ,
वो तेरा क्या होगा।
- मोतीउर रहमान
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