उड़ी हमले में हमारे कुछ जवान यादों में खो गए,
उठे नहीं कभी, कुछ ऐसी नींद में सो गए,
ग्यारह दिन बाद जली क्रोध की ऐसी मशाल थी,
दुनिया के लिए महज जवाब नहीं जवाब की कतार थी,
जंग का उसूल हमने क्या खूब निभाया है,
उसकी जमीन में तिरंगा लहरा कर, देखो फौजी वापस आया है,
ना किसी की मां रोई ना किसी के पिता बिखल उठे,
हर भारतीय के चौड़े कंधे और चौड़े हो उठे,
दिखा दिया कि हम वंशज है उन महाराणा प्रताप के,
हल्दीघाटी में मुगलों को के किए जिसने खट्टे दांत थे
उड़ी हमले में हमारे कुछ जवान यादों में खो गए
उठे नहीं कभी, कुछ ऐसी नींद में सो गए...
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