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कठुआ की निर्भया

mohit chauhan

Mere Alfaz
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                            चीखे जा रही थी, चिल्लाए जा रही थी
        
                                                    
                            
वो मासूम बच्ची, दर्द से कराहे जा रही थी

क्या गलती थी उसकी, क्या गुनाह था उसका
किस बात की सज़ा उसे दी जा रही थी

नोच रहे थे वो हैवान उस नन्हीं जान को
पर किसी को भी दया ना आ रही थी

कोई न आया उसकी मदद के लिये, क्योंकि
मंदिर की घंटियां बजाकर उसकी आवाज़ दबाई जा रही थी

आठ साल की मासूम बच्ची थी वो
शाम को घर से खेलने के लिए निकली थी वो

किसी ने नहीं सुनी उसकी चीख़ पुकार
एक बार फिर हुआ सारा देश शर्मसार

मिटा के अपनी हवस की प्यास
फेंक दिया उसे खून से लथपथ बदहवास

दुर्गा माँ की पूजा की जाती है जहां
हैवानियत ने ऐसा घिनौना रंग दिखाया है वहां

किया था जिन्होंने पद्मावती को लेकर हंगामा
वो कर्णी सेना वाले आज हैं कहाँ

मौन है आज सियासी खेल खेलने वाले
यही होता आया है, यही होता रहेगा यहां

देख ये बर्बरता, ये खौफ़नाक मंज़र, ज़हन में सवाल उठता है
न जाने गुम हो गई है इंसानियत कहां

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