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ये सपना था य़ा राज कचौड़ी

MOHD TASVIRUL ISLAM

Mere Alfaz
                                    
                                                                        
                            बीवी बोली आज मुझे
        
                                                    
                            
मूड नहीं तुम जाने दो
आज कुछ तुम्ही बनाओ
चटपटा ज़रा कुछ खाने को

मैने बोला इसमे क्या है
चलो किचन मे चलते हैं
रेसिपी ले मोबाइल से
आज ज़रा कुछ तलते हैं

तब मन बैरागी ने ये बोला
आज शान बना कुछ करते हैं
मिर्च मसाला डाल के सब कुछ
आज पकौड़े तलते हैं

आज पकौड़े खूब तलेंगे
बीवी की सेवा भी करेंगे
चाय श्रीमती को देकर
अपने हुनर को परखेंगे

तब लगा खोजने बेसन आलू
चीनी मिले तो चाय मे डालूँ
बर्तन भी गुस्से मे बोले
मैँ तो तेरे संग न डोलूँ

फिर प्लेट निकाला प्याज को काटा
मन मे था मेरे ज्वार भाटा
कोई बर्तन मिले न जल्दी
नमक मिले फिर डालूँ  हल्दी

कुछ जल्द बने तो लेकर जाऊँ
नींद उडी थी किसको बताऊँ
हाथ ज़ोड कर बोला मैँ भी
जल्द बनो तुम चाय पकौड़ी

जब पहुँचा बेगम के ड्योड़ी
जल्द बना मैँ चाय पकौड़ी
खूब खिलाया मन भर कर मैँ
ये सपना था य़ा राज कचौड़ी
4 वर्ष पहले
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