थोड़ा थक सा जाता हूँ अब मैं
इसलिए दूर तक निकलना छोड़ दिया है
पर ऐसा भी नहीं है कि अब
मैंने अब अपनो से मिलना छोड़ दिया है
फासलें अक्सर रिश्तों के बागीचें मे
अजीब सी दूरियाँ बढ़ा जाते हैं
पर ऐसा भी नहीं है कि अब मैंने अपनो से
मिलना जुलना छोड़ दिया है
हाँ जरा सा अकेला महसूस करने लगा हूँ खुद को
अपनो लोगो की भीड़ में
पर ऐसा भी नहीं है कि अब मैंने उन अपनो से
अपनेपन को जताना छोड़ दिया है
बड़ी कमी सी महसूस होती है अहसासों मे
पर ऐसा भी नहीं है उनके दिल का हाल जानना छोड़ दिया है
पल पल बदलते रिश्तो से अब डर जाने क्यूँ लगता है
अपने जी का जन्जाल बनाना छोड़ दिया है
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