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इश्क के चक्कर में

MOHD TASVIRUL ISLAM

Mere Alfaz
                                    
                                                                        
                            इश्क के चक्कर में पड़ कर मैं
        
                                                    
                            
हर सपने से आजाद हुआ
बनना था मुझे जिला कलेक्टर
इश्क मे पड़ लाचार हुआ
इश्क का रोग लगा है जबसे
बहुत बुरे हालात रहे
छोड़ मोहब्बत निकल गई वो
दिल रो रो कर बर्बाद हुआ
जब देखा अपनो का गुस्सा
हालत मेरी हुई खराब
घर वालों के असली प्यार का
आज मुझे एहसास हुआ
पल पल खूब बदलते चेहरे
इस इश्क मे पड़ कर देखें हैं
सपने आज धरातल पर हैं
दिल का सच से गठज़ोड हुआ
प्यार करो उम्मीद ना पालो
मेहनत करते जाओ बस
नाम करो माँ बाप का रोशन
यही सत्य संजोग हुआ
2 वर्ष पहले
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