विज्ञापन

एक बार अकेले में मुलाकात कीजिए

MOHD TASVIRUL ISLAM

Mere Alfaz
                                    
                                                                        
                            इस तरह इश्क की शुरुआत कीजिए
        
                                                    
                            
सूरज पर जुल्फें डालकर फिर रात कीजिए
सूखी पड़ी है दिल की जमीन मुद्दतों से यार
एक बार अकेले में मुलाकात कीजिए

हिलने ना पाए होन्ठ कह जाए बहुत कुछ
आंखों में आंखें डालकर इजहार कीजिए
हर रोज मुलाकातें बस दिल की हो बातें
बनके घटाएं प्यार की बरसात कीजिए

चेहरा रहे नुरानी सीरत रहे मुकद्दस
हौसला दिल मे रख कर आगाज कीजिये
उम्मीद के आंगन मे दुशवारियां भी होंगी
चाहत की इबादत को परवाज कीजिये

जन्नतुल फिरदौस है दिल आफताब है
कोशिशों से ही दुनिया कामयाब है
तस्वीर बन्दगी में दिल बन्दा नवाज है
पाक दिल से दिल का इस्तेकबाल कीजिये

एक बार अकेले मे मुलाकात कीजिये
इस तरह इश्क की शुरुआत कीजिये


- हमें विश्वास है कि हमारे पाठक स्वरचित रचनाएं ही इस कॉलम के तहत प्रकाशित होने के लिए भेजते हैं। हमारे इस सम्मानित पाठक का भी दावा है कि यह रचना स्वरचित है। 

आपकी रचनात्मकता को अमर उजाला काव्य देगा नया मुक़ाम, रचना भेजने के लिए यहां क्लिक करें
6 वर्ष पहले
विज्ञापन

विशेष

आज के शीर्ष कवि Show all

Rajiv Tyagi

423 कविताएं

View Profile

Anil Kumar

4215 कविताएं

View Profile

Sanjay Nirala

42 कविताएं

View Profile

RATAN KUMAR

614 कविताएं

View Profile