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एक बार अकेले में मुलाकात कीजिए

                
                                                         
                            इस तरह इश्क की शुरुआत कीजिए
                                                                 
                            
सूरज पर जुल्फें डालकर फिर रात कीजिए
सूखी पड़ी है दिल की जमीन मुद्दतों से यार
एक बार अकेले में मुलाकात कीजिए

हिलने ना पाए होन्ठ कह जाए बहुत कुछ
आंखों में आंखें डालकर इजहार कीजिए
हर रोज मुलाकातें बस दिल की हो बातें
बनके घटाएं प्यार की बरसात कीजिए

चेहरा रहे नुरानी सीरत रहे मुकद्दस
हौसला दिल मे रख कर आगाज कीजिये
उम्मीद के आंगन मे दुशवारियां भी होंगी
चाहत की इबादत को परवाज कीजिये

जन्नतुल फिरदौस है दिल आफताब है
कोशिशों से ही दुनिया कामयाब है
तस्वीर बन्दगी में दिल बन्दा नवाज है
पाक दिल से दिल का इस्तेकबाल कीजिये

एक बार अकेले मे मुलाकात कीजिये
इस तरह इश्क की शुरुआत कीजिये


- हमें विश्वास है कि हमारे पाठक स्वरचित रचनाएं ही इस कॉलम के तहत प्रकाशित होने के लिए भेजते हैं। हमारे इस सम्मानित पाठक का भी दावा है कि यह रचना स्वरचित है। 

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6 वर्ष पहले

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