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एक बार इश्क़ की नगरी में

MOHD TASVIRUL ISLAM

Mere Alfaz
                                    
                                                                        
                            एक बार इश्क की नगरी में
        
                                                    
                            
ये दिल अपना बेचैन हुआ
सुन्दर परियों की झलक देख
ये मन पागल मेरा मौन हुआ

जिसने अब तक परी ना देखी
उसे परी भीड़ मे कर देना
सांस भी ऊपर नीचे होते देख
ये दिल कितना कमज़ोर हुआ

रात को सपना इतना आये
ई दिल परियों संग जीना चाहे
कोई दूर ना कर दे यहां से
ये दिल सोच सोच मजबूर हुआ

परियां कितना हसीन हैं होती
मंत्र मुग्ध कर देती हैं
अच्छे जीवन का सपना देख
ये मन मेरा भाव विभोर हुआ
 

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5 वर्ष पहले
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