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एक बार इश्क़ की नगरी में

                
                                                         
                            एक बार इश्क की नगरी में
                                                                 
                            
ये दिल अपना बेचैन हुआ
सुन्दर परियों की झलक देख
ये मन पागल मेरा मौन हुआ

जिसने अब तक परी ना देखी
उसे परी भीड़ मे कर देना
सांस भी ऊपर नीचे होते देख
ये दिल कितना कमज़ोर हुआ

रात को सपना इतना आये
ई दिल परियों संग जीना चाहे
कोई दूर ना कर दे यहां से
ये दिल सोच सोच मजबूर हुआ

परियां कितना हसीन हैं होती
मंत्र मुग्ध कर देती हैं
अच्छे जीवन का सपना देख
ये मन मेरा भाव विभोर हुआ
 

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5 वर्ष पहले

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