एक बार अकेले में मुलाकात कीजिये
दिल की चाहत का एहसास कीजिये
सूखी पड़ी है दिल की जमीन मुद्दतों से यार
बनके घटाएं प्यार की बरसात कीजिए
हिलने ना पाए होंठ कह जाए सारी बात
आंखों में आंखें डालकर इजहार कीजिए
हर रोज मुलाकातें बस दिल की हो बातें
इस तरह इश्क की शुरुआत कीजिये
मीठी सी नोक झोंक की शुरुआत कीजिये
चाहत के अरमानों का इजहार कीजिये
जब सामना हो तुमसे नस्तर सा लगे दिल को
संग ज़िन्दगी जीने का आगाज कीजिये
दुनिया के रंजो गम से ना टूटना सनम जी
मैं पूरा हूँ तुम्हारा ना रहना इस भरम जी
मुश्किल भरे हालात आयेंगे ज़िन्दगी में
मिलकर करेंगे सामना हालात-ए-ज़िंदगी की
- हमें विश्वास है कि हमारे पाठक स्वरचित रचनाएं ही इस कॉलम के तहत प्रकाशित होने के लिए भेजते हैं। हमारे इस सम्मानित पाठक का भी दावा है कि यह रचना स्वरचित है।
आपकी रचनात्मकता को अमर उजाला काव्य देगा नया मुक़ाम, रचना भेजने के लिए यहां क्लिक करें।