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बचपन सपना

MOHD TASVIRUL ISLAM

Mere Alfaz
                                    
                                                                        
                            कागज के मैं नांव बना कर
        
                                                    
                            
पानी पर उसको दौड़ाता
जादू मंतर के बलबूते
आसमान मे सैर को जाता

स्वर्ग लोक मे परियों से मिल
प्रेम की पींगे खूब पिलाता
सबको मोहक हंसी से अपने
घायल कर दिल मे बस जाता

सबको अपने मोहपाश मे कर
खेल अनोखे खूब दिखाता
सबको बुला बुला कर मैं तो
प्यार के सारे पाठ पढ़ाता

खूब कहानी सुन सुन कर मैं
ग्यान मैं अपने खूब बढ़ाता
सबके दिल को खुश करने को
मन मोहक मुस्कान मैं लाता

मैं विश्व के सारे गम को
दूर बहुत ही दूर ले जाता
सबके मन मे खुशियाँ भर मैं
आसमान मे ज़श्न मनाता

निकल मैं जाता दूर कहीं मैं
माँ की आँख का तारा बन कर
खूब ग्यान का अर्जन कर के
वापस अपने घर को आता

खूब टहलता पापा माँ संग
देशाटन की सैर को जाता
जग की सारी तकलीफों को
पल भर मे छूमंतर कर जाता

नींद खुली तब पता लगा ये
सपना कितना हसीन है होता
य़ा रब बचपन लौटा भी दो
सपना सच करना सिखला दो
2 वर्ष पहले
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