विज्ञापन

अपना मुझको कौन कहेगा

MOHD TASVIRUL ISLAM

Mere Alfaz
                                    
                                                                        
                            अपना मुझको कौन कहेगा
        
                                                    
                            
दिल मे शामिल कौन रहेगा
प्यार की मीठी मीठी बतियां
संग मेरे अब कौन करेगा

हर पल बदलती दुनिया मे 
अपना मरहम कौन बनेगा
जीवन के मुश्किल डगरों पर
संग साथ में कौन चलेगा

सुख-दुख मिलकर कौन सहेगा
मुझमे हिम्मत कौन भरेगा
तबीयत बिगड़े अगर किसी की
तो उसमे दिलासा कौन भरेगा

इतना ही बता दो मेरे मरहम
साथ संग अब कौन रहेगा
अपनी चंचल हरकत से
तंग मुझे अब कौन करेगा

बचपन की वो सारी आदत
मस्त जवाँ और हरफनमौला
बिना किसी तकलीफ के जीना
वो प्यारा बचपन कौन भरेगा

याद जो आ जाये जब उनकी
मन को शीतल कौन करेगा
जीते जी जन्नत को पाना
संग मेरे अब कौन करेगा
 
- हम उम्मीद करते हैं कि यह पाठक की स्वरचित रचना है। अपनी रचना भेजने के लिए यहां क्लिक करें।
4 वर्ष पहले
विज्ञापन

विशेष

आज के शीर्ष कवि Show all

Anil Kumar

4215 कविताएं

View Profile

Sanjay Nirala

42 कविताएं

View Profile

Rajiv Tyagi

423 कविताएं

View Profile

Updesh Kumar

12437 कविताएं

View Profile