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अपना मुझको कौन कहेगा

                
                                                         
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दिल मे शामिल कौन रहेगा
प्यार की मीठी मीठी बतियां
संग मेरे अब कौन करेगा

हर पल बदलती दुनिया मे 
अपना मरहम कौन बनेगा
जीवन के मुश्किल डगरों पर
संग साथ में कौन चलेगा

सुख-दुख मिलकर कौन सहेगा
मुझमे हिम्मत कौन भरेगा
तबीयत बिगड़े अगर किसी की
तो उसमे दिलासा कौन भरेगा

इतना ही बता दो मेरे मरहम
साथ संग अब कौन रहेगा
अपनी चंचल हरकत से
तंग मुझे अब कौन करेगा

बचपन की वो सारी आदत
मस्त जवाँ और हरफनमौला
बिना किसी तकलीफ के जीना
वो प्यारा बचपन कौन भरेगा

याद जो आ जाये जब उनकी
मन को शीतल कौन करेगा
जीते जी जन्नत को पाना
संग मेरे अब कौन करेगा
 
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4 वर्ष पहले

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