आतंक से कश्मीर का दिल बेकल हो जाता है
पोते के सामने दादा गहरी नींद सो जाता है
आतंकी कह कर उसका मखौल उडाया जाता है
दादा की लाश पर बच्चे को बैठाया जाता है
हिन्दू मुस्लिम,मुस्लिम हिन्दू करके लडवाया जाता है
सत्ता लोलुप नेता द्वारा लाशों पर जंग कराया जाता है
जात पांत के चश्मे से इंसानो को देखा जाता है
मानवता बस अपने ही धर्मो के सांचे से देखा जाता है
पुलिस बिक गयी ज़ज बिक गए बिक गए हैं सारे नेता भी
इंसानो को कौन पूछता, बेईमान को पूजा जाता है
पुलिस हिरासत मे मार दिया जाता है तड़पाकर बाप बेटे को
फिर उनका अपराधिक इतिहास बनाया जाता है
जहां पर गुंडे पुलिस को मारे उनको वीर बताया जाता है
खास धर्म का हो तो वो मंत्री बनवाया जाता है
सीधे साधे लोगो की कोई पूछ नहीं इस धरती पर
उनके मिनट भर के कामो मे उन्हे घंटों दौडाया जाता है
अंधभक्तों का क्या होगा जिनकी मति हुई हो भंग
बाप हुआ ज़िसका हो तंग, उसका बेटा रहता नेता संग
सबको एक समान दृष्टी दुनिया पता नही कब देखेगी
ना जात ना पाँत, ना मार कांट ये मानवता कब देखेगी
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