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जब दर पे आ गया हूँ तेरे तो बन संवर के देख ग़ज़ल

Mohd Ajram

Mere Alfaz
                                    
                                                                        
                            इस तरह ना तू मुझको अब यूँ घूर कर के देख
        
                                                    
                            
जब दर पे आ गया हूँ तेरे तो बन सँवर के देख

मैं जानता हूँ ऐसे ख़फ़ा क्यूँ है मुझसे तू मग़र
मैं मुश्किलों से गुजरा हूँ मेरी राहगुज़र के देख

इस तरह सर को झुकाए हुए यूँ क्यूँ खडा है तू
सर को उठा ए यार मेरे इक नज़र भर के देख

हो जाएगा यकीन मेरी मजबूरियों का तुझको
इक बार मेरे दिल में तू ज़रा झाँक कर के देख

ऐसी भी क्या उज़लत है बिछड़ने की अब तुझे
इक बार तो ज़रा सा तू मुझको ठहर के देख

जिन्दा रहेगा कैसे तू उसके बगैर ए ,जलाल,
मर जाएगा गली से उसकी कूच कर के देख

किस हद से गुज़र जाएगा तेरे इश्क़ में जलाल
इक बार तो तू यह भी ज़रा सोच कर के देख

मेरे लिए तो उसकी गली का पत्थर भी फ़ूल है
पेशानी पर सज़ा लूँगा इधर फेंक कर के देख
-मोहम्मद अजरम
2 घंटे पहले
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