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सबकी कहानी

Mohammad Naseem

Mere Alfaz
                                    
                                                                        
                            हमने भी शुरू दोस्ती से किया था
        
                                                    
                            
हर एक पल उसके साथ जिया था

वो उर्दू सी कोई मुकम्मल नज़्म थी
सुने उसको दुनिया वो ऐसी बज्म थी

खामोशी भी सुनती बड़ी गौर से वो
इतनी न खुली थी किसी और से वो

वो जर्रे बराबर भी बाते बताती
कभी तो मुझे गाना गा कर सुनाती

हया की चादर में लिपटी हुई वो
निगाहों की हद में सिमटी हुई वो

मैं ही क्या उसपे दुनिया फिदा थी
मगर वो न जाने क्यों सबसे जुदा थी
3 वर्ष पहले
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