आक्रोश में अवशेष हूँ,
विभोर में प्रेत हूँ,
भय में प्रचलित,
हृदय में क्षुब्ध हूँ।
हो समय, एकांत में,
अश्रुओं का भंडार हूँ।
भाद्र की बदरा से,
भावों की अवज्ञा से,
अस्थिर, अपरिचित, दुखमय।
क्यों मैं अनुचित,
अहम् से विमुख,
तिमिर में भेद,
पूर्ण, परन्तु परित्यक्त हूँ।
माया से धृत,
अन्य के लिए अतिरिक्त,
विस्मृत,
स्मृति में अनुचित,
मात्र मैं स्वयं