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तेरी यादें जो आ जायें तो बस

MD Shahabuddin

Mere Alfaz
                                    
                                                                        
                            अबके हवा में किसने ये जहर घोला है
        
                                                    
                            
चराग छोड़ के महफ़िल बुझाये जाती है

साँसे रूक नहीं सकतीं, अना का सवाल भी है
मेरे जिस्म में तेरी खुश्बू समाये जाती है

शायद लौटने का रास्ता नहीं मालूम है इनको
तेरी यादें जो आ जाये तो बस फिर आये जाती है

- MD Shahabuddin

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