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तेरी यादें जो आ जायें तो बस

                
                                                         
                            अबके हवा में किसने ये जहर घोला है
                                                                 
                            
चराग छोड़ के महफ़िल बुझाये जाती है

साँसे रूक नहीं सकतीं, अना का सवाल भी है
मेरे जिस्म में तेरी खुश्बू समाये जाती है

शायद लौटने का रास्ता नहीं मालूम है इनको
तेरी यादें जो आ जाये तो बस फिर आये जाती है

- MD Shahabuddin

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7 वर्ष पहले

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