चेहरे से खुश दिल से सोगंवार सा है
हर शख्स मोहब्बत मे कुछ बीमार सा है
नाकाबिल समझ के जिसको निकाला है तूने घर से
वही शख्स मेरी कहानी में एक किरदार सा है
बदन पे झुर्रियां की बालो में सफेदी आ तो गयी है
पर चेहरा अभी भी माँ का परवर दीगार सा है
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