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ज़रा सा जी क्या लिए

mayank vajpeyee

Mere Alfaz
                                    
                                                                        
                            जरा सा जी क्या लिए हम ज़िंदगी बुरा मान गई लगती है
        
                                                    
                            
कल हंसते देख लिया था शायद तभी तो आज आफ़तों की बाढ़ आई लगती है
मज़ा आर रहा है फिर भी इस हाल में शायद मुझको नई नई मोहब्बत हुई लगती है
आफ़तों को आदत बनाने की चाह सी है अब तो यकीनन ये हरकत तुम्हारे ख़ुमार की लगती है
एक महीने पहले
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