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लागत हमको बस हरि हमरो इतना ही चावत है

mayank vajpeyee

Mere Alfaz
                                    
                                                                        
                            मूरख हैं नहीं जानत हैं
        
                                                    
                            
कहैं परीक्षा लेवत हरि
पीर हमारी नहीं जानत है
पूछो जरा उन मूढ़ से
पीर हमार देह हमार फिर हरि भला क्यों रोवत है
पीर भी उसकी उसके हम
वो अनंत भला क्या पावत क्या खोवत है
सीख लें हम गिरना फिर उठना
लागत हमको बस हरि हमरो इतना ही चावत है
12 घंटे पहले
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