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बस रेज़गारी और तरकारी थोड़ा मसरूफ़ रखती है

mayank vajpeyee

Mere Alfaz
                                    
                                                                        
                            जो ये भीड़ चुप सी बैठी है
        
                                                    
                            
ऐसा नहीं तुमसे जरा भी इत्तेफाक रखती है
तुम्हारे सच से झाँकता झूठ रोज़ दिखता है उनको
बस रेज़गारी और तरकारी थोड़ा मसरूफ़ रखती है
2 घंटे पहले
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