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वसी शाह: आँखों में चुभ गईं तिरी यादों की किर्चियाँ

wasi shah famous ghazal ankhon mein chubh gayin teri yadon ki kirchiyan
                
                                                         
                            

आँखों में चुभ गईं तिरी यादों की किर्चियाँ
काँधों पे ग़म की शाल है और चाँद रात है

दिल तोड़ के ख़मोश नज़ारों का क्या मिला
शबनम का ये सवाल है और चाँद रात है

कैम्पस की नहर पर है तिरा हाथ हाथ में
मौसम भी ला-ज़वाल है और चाँद रात है

हर इक कली ने ओढ़ लिया मातमी लिबास
हर फूल पुर-मलाल है और चाँद रात है

छलका सा पड़ रहा है 'वसी' वहशतों का रंग
हर चीज़ पे ज़वाल है और चाँद रात है

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46 minutes ago

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