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मोहब्बत का नूर

Master Abhay

Mere Alfaz
                                    
                                                                        
                            उसकी आँखों में मुझे मोहब्बत का नूर नज़र आता है,
        
                                                    
                            
जब भी नज़रें मिलती हैं वो मुस्कुराता नज़र आता है।

दुनिया की भीड़ में जब घबराती हैं धड़कनें मेरी,
सिर्फ वही एक शख्स में मुझे मेरा सुकून नज़र आता है।

खामोशियों में भी पढ़ लेता है वो हर बात दिल की,
उसके तसव्वुर में मुझे इश्क का फितूर नज़र आता है।

माँग लूँ रब से उसे या चुरा लूँ इस ज़माने से,
उसके संग ज़िंदगी का हर सफ़र सुहाना नज़र आता है।

छुपा लूँ इन धड़कनों में उसे अपने ख्वाब की तरह,
उसके होने से ही इस जहां में मेरा वजूद नज़र आता है।

उसकी आँखों में मुझे मोहब्बत का नूर नज़र आता है,
जब भी नज़रें मिलती हैं वो मुस्कुराता नज़र आता है।

अजब सा सुकून मिलता है उसकी बातों की गर्माहट में,
जैसे अंधेरों ख्वाबों में कोई रोशन चराग़ नज़र आता है।

वो पास हो तो ठहर जाते हैं ये वक़्त के लम्हे भी,
उसकी ज़ुल्फ़ों के साये में पूरा जहाँ नज़र आता है।

उसकी इबादत में बिता दूँ ये उम्र-ए-दराज़ अपनी,
उसके इश्क में ही मुझे खुदा का नूर नज़र आता है।
4 घंटे पहले
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