छम-छम घुँघरू बाज रहे हैं, काँवड़ियों के पाँव में।
बम-बम बम-बम बोल रहे हैं, नगर ढाणियों गाँव में।।
सावन में शिव के भक्तों की, लम्बी लगी कतार है।
जगती में भोले बाबा की, होती जय-जयकार है।
तिलक लगाकर भक्ति भाव से, बैठे वट की छाँव में,
बम-बम बम-बम बोल रहे हैं, नगर ढाणियों गाँव में।।
गागर में जल भरकर लाते, भक्त बड़े ही प्यार से।
कोई जाते ले जल काशी, कुछ जाते हरिद्वार में
।डम-डम डमरू बाज रहे हैं, सुस्ताते पथ दाँव में,
बम-बम बम-बम बोल रहे हैं, नगर ढाणियों गाँव में।।
सुन्दर सजा रहे काँवड़ को, चुनरी गोटेदार से।
शिव का नित गुणगान करें सब, हृद श्रद्धा आभार से।
जो मिल जाए हर्ष मानसी, यजमानों की ठाँव में,
बम-बम बम-बम बोल रहे हैं, नगर ढाणियों गाँव में।।
-मानसी मित्तल