अंधविश्वास हमें न करना।
जग में बस आगे है बढ़ना।
रस्ता जो काटेगी बिल्ली।
उड़ जाएगी उसकी गिल्ली।
बुरा न अब कोई दिन होगा।
रोज काम सब गिन गिन होगा।
कटेंगे अब नाखून उसी दिन।
बड़े दिखेंगे हमको जिस दिन।
अब हो चाहे संडे या मंडे।
धुलेंगे बाल मिलाकर अंडे।
मिर्ची नींबू ना हम लटकाएंगे।
अंधविश्वास सब दूर भगाएंगे।
विश्वास हमें है धोखा कभी न खाएंगे।
कभी किसी के झांसे में हम न आएंगे।
मनोज यादव
कानपुर उत्तरप्रदेश
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