विज्ञापन

ग़ज़ल

Manoj Yadav

Mere Alfaz
                                    
                                                                        
                            हमें आपसे कुछ अदावत नहीं है।
        
                                                    
                            
मगर ये भी सच है मुहब्बत नहीं है।

बहुत जख्म खाए मुहब्बत में हमने।
मगर और खाने की ताकत नहीं है।

तुम्हें छोड़कर दिल लगाएं किसी से।
बची आज इतनी भी हिम्मत नहीं है।

हमें जिंदगी में मिले प्यार उसका।
हमारी तो ऐसी भी किस्मत नहीं है।

अभी छोड़ दो तुम हमें यार तन्हां।
अभी दिल लगाने की फुर्सत नहीं है।

मनोज यादव
कानपुर उत्तरप्रदेश



हमें विश्वास है कि हमारे पाठक स्वरचित रचनाएं ही इस कॉलम के तहत प्रकाशित होने के लिए भेजते हैं। हमारे इस सम्मानित पाठक का भी दावा है कि यह रचना स्वरचित है। 

आपकी रचनात्मकता को अमर उजाला काव्य देगा नया मुक़ाम, रचना भेजने के लिए यहां क्लिक करें
7 वर्ष पहले
विज्ञापन

विशेष

आज के शीर्ष कवि Show all

RATAN KUMAR

613 कविताएं

View Profile

Rajiv Tyagi

423 कविताएं

View Profile