हमें आपसे कुछ अदावत नहीं है।
मगर ये भी सच है मुहब्बत नहीं है।
बहुत जख्म खाए मुहब्बत में हमने।
मगर और खाने की ताकत नहीं है।
तुम्हें छोड़कर दिल लगाएं किसी से।
बची आज इतनी भी हिम्मत नहीं है।
हमें जिंदगी में मिले प्यार उसका।
हमारी तो ऐसी भी किस्मत नहीं है।
अभी छोड़ दो तुम हमें यार तन्हां।
अभी दिल लगाने की फुर्सत नहीं है।
मनोज यादव
कानपुर उत्तरप्रदेश
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