विज्ञापन

श्रद्धा

Manoj Sinha

Mere Alfaz
                                    
                                                                        
                            आस्था और विश्वास
        
                                                    
                            
संचित हैं, ह्रदय के
हर अंश, हर कण में
जैसे संचित हो अश्रु-जल
कोटि-कोटि नैनों में
भाव भरे हैं, राज-कण में
अंबक मूंद शीश झुकाते हैं
हे! देवश्रेष्ठ तेरे पावन चरणों में
विश्वास हृदय में बसा
वह मानक मूल्य है
जो सनातन है, आदि काल से
सागर की गरजती लहरों में
पर्वत की ऊंची शिखरों पे
भूतल की अचल गहराइयों में
रहती है आस्था विहंगम नाना रूप में
दे देना, प्रभु अंजुरी भर कर स्नेह
धन्य-धन्य हो जाए मेरा जीवन ।।
3 वर्ष पहले
विज्ञापन

विशेष

आज के शीर्ष कवि Show all

Aalam-e-Ghazal Parvez

281 कविताएं

View Profile