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जल बूंदे

Manoj Sinha

Mere Alfaz
                                    
                                                                        
                            बूंदों में जन्म लेकर
        
                                                    
                            
विराट स्वरूप में आना है
मेरे जीवन का यह अनुक्रम
मिट कर भी कुछ दे जाना है।।

जीवन को जीवन देना
है, मेरा धर्म- कर्म
इस हेतु ही हुआ है
मेरे जन्म का अर्थ
लघु बूंद बन
मैं धरा पर आती हूं
फिर विशाल जल धारा बन
तुम्हारे समक्ष प्रस्तुत हो जाती हूं
फिर मैं ,नदी कहलाती हूं
फिर मैं ,नदी कहलाती हूं
बूंद- बूंद जल की बूंदें
रचती- बुनती जीवन को
बसाती अपने तट पर
सभ्यता और संस्कृति को।।

बूंदों में जन्म लेकर
विराट स्वरूप में आना है
मेरे जीवन का यह अनुक्रम
स्वयं मिट कर भी कुछ दे जाना है।।

विचलित नहीं होती मैं
कभी भी अपने पथ से
सदा अनवरत- निरंतर रहती हूं
अपने जीवन -वृत में
प्रकृति के नियमों से
कभी- कभी बंध जाती हूं
इस कारण ही कुछ विलंब से
वर्षा ऋतु में कभी -कभी आती हूं
मेरे असमय आने से
स्थिति हो जाती है, विषम सी
सूखा- अकाल पड़ जाता है
भू- मंडल के चतुर्दिक
त्राहिमाम मच जाता है
फिर अपने पथ अवसाद छोड़ जाता है।।

बूंदों में जन्म लेकर
विराट स्वरूप में आना है
मेरे जीवन का यह अनुक्रम
मिट कर भी कुछ दे जाना है
मेरे जीवन का यह अनुक्रम
मिट कर भी कुछ दे जाना है।।
-मनोज सिन्हा
 
एक वर्ष पहले
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