टूटे तारे तारापथ से
अंबर कब शोक मनाता है?
तुम हो क्यों दुःख से सिक्त?
जीवन कर रही यात्रा अनंत
आत्मा कब शोक मनाता है?
माना कि था, प्रेम अगाध उससे
था वह , शुभेच्क्षु मेरा दीर्घतम
पर नहीं अधिकार है, किसी का
जो नियंत्रित कर ले जीवन का यह क्रम
जीवन तो मात्र खिलौना है
आना- जाना तो एक रंगमंच है
निभा भूमिका भावों से अभिसिक्त हो
कर्तव्य अपना सर्वस्व दे जाना है
अजर अमर तो आत्मा है, उसे कहां जाना है?
अजर अमर तो आत्मा है, उसे कहां जाना है?
- मनोज सिन्हा