विज्ञापन

आत्मा की यात्रा

Manoj Sinha

Mere Alfaz
                                    
                                                                        
                            टूटे तारे तारापथ से
        
                                                    
                            
अंबर कब शोक मनाता है?
तुम हो क्यों दुःख से सिक्त?
जीवन कर रही यात्रा अनंत
आत्मा कब शोक मनाता है?

माना कि था, प्रेम अगाध उससे
था वह , शुभेच्क्षु मेरा दीर्घतम
पर नहीं अधिकार है, किसी का
जो नियंत्रित कर ले जीवन का यह क्रम
जीवन तो मात्र खिलौना है
आना- जाना तो एक रंगमंच है
निभा भूमिका भावों से अभिसिक्त हो
कर्तव्य अपना सर्वस्व दे जाना है
अजर अमर तो आत्मा है, उसे कहां जाना है?
अजर अमर तो आत्मा है, उसे कहां जाना है?
- मनोज सिन्हा
 
एक वर्ष पहले
विज्ञापन

विशेष

आज के शीर्ष कवि Show all

Anil Kumar

4215 कविताएं

View Profile

Nema Ram

141 कविताएं

View Profile