आप अपनी कविता सिर्फ अमर उजाला एप के माध्यम से ही भेज सकते हैं

बेहतर अनुभव के लिए एप का उपयोग करें

विज्ञापन

आत्मा की यात्रा

                
                                                         
                            टूटे तारे तारापथ से
                                                                 
                            
अंबर कब शोक मनाता है?
तुम हो क्यों दुःख से सिक्त?
जीवन कर रही यात्रा अनंत
आत्मा कब शोक मनाता है?

माना कि था, प्रेम अगाध उससे
था वह , शुभेच्क्षु मेरा दीर्घतम
पर नहीं अधिकार है, किसी का
जो नियंत्रित कर ले जीवन का यह क्रम
जीवन तो मात्र खिलौना है
आना- जाना तो एक रंगमंच है
निभा भूमिका भावों से अभिसिक्त हो
कर्तव्य अपना सर्वस्व दे जाना है
अजर अमर तो आत्मा है, उसे कहां जाना है?
अजर अमर तो आत्मा है, उसे कहां जाना है?
- मनोज सिन्हा
 
- हम उम्मीद करते हैं कि यह पाठक की स्वरचित रचना है। अपनी रचना भेजने के लिए यहां क्लिक करें।
एक वर्ष पहले

कमेंट

कमेंट X

😊अति सुंदर 😎बहुत खूब 👌अति उत्तम भाव 👍बहुत बढ़िया.. 🤩लाजवाब 🤩बेहतरीन 🙌क्या खूब कहा 😔बहुत मार्मिक 😀वाह! वाह! क्या बात है! 🤗शानदार 👌गजब 🙏छा गये आप 👏तालियां ✌शाबाश 😍जबरदस्त
विज्ञापन
X
बेहतर अनुभव के लिए
4.3
ब्राउज़र में ही

अब मिलेगी लेटेस्ट, ट्रेंडिंग और ब्रेकिंग न्यूज
आपके व्हाट्सएप पर