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कुछ बातें मन की

Manoj Kumar sinha

Mere Alfaz
                                    
                                                                        
                            धूल भरी शाम में
        
                                                    
                            
गोधूली आकाश में
कुछ धीमी कुछ मद्धम
छनी हुई रौशनी
उतर रही मैदान में
सूरज धीमे धीमे
बढ़ रहा अवसान को
चांद उतावला हो रहा
खिलने आसमान को
हर दिवस दुहरा रहा
हर यामिनी बिहंस रही
रात के इंतजार में
सूरज चांद तारों के
उदय और अवसान में।।

धूल भरी शाम में
गोधूली आकाश में
............
लूका छिपी मेघों का
बवंडर बन कर घूम रहा आसमान में
कभी उदित हो रहा कभी छिप रहा
सूरज और चांद
विहान ओर विभावरी के आस में
विहंगम दृश्य प्रकृति का
चल रहा चलचित्र सा
सर्दी गर्मी बरसात में
प्रकृति के साथ में।।

झरनों के मुस्कान से
श्वेत धार के प्रवाह में
उतर रही जिंदगी
वसुंधरा के आगोश में।।

प्रबल प्रवाह
बह रही
कभी बीच धार
कभी मझधार
ढूंढ रही अपना ठिकाना
किसी एक ठहराव
किसी एक विराम में।।

धूल भरी शाम में
गोधूली आकाश में
कुछ धीमी कुछ मद्धम
छनी हुई रौशनी
उतर रही मैदान में
उतर रही मैदान में।।
-मनोज सिन्हा।
7 महीने पहले
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