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जिंदगी

Manmohan Singh

Mere Alfaz
                                    
                                                                        
                            खुली आसमान के नीचे मैं बैठा हूं
        
                                                    
                            
हवाएं जोरों से चल रही है
पर मैं वहीं बैठा हूं
मैं सोच रहा हूं
हवाएं तो चल रही है अपने मगन में
पर मेरी जिदंगी क्यों रुकी हुई है
कोई तो बतलादो ऐसा क्यों?

मनमोहन सिंह
दरभंगा बिहार
3 वर्ष पहले
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