खुली आसमान के नीचे मैं बैठा हूं
हवाएं जोरों से चल रही है
पर मैं वहीं बैठा हूं
मैं सोच रहा हूं
हवाएं तो चल रही है अपने मगन में
पर मेरी जिदंगी क्यों रुकी हुई है
कोई तो बतलादो ऐसा क्यों?
मनमोहन सिंह
दरभंगा बिहार
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