विज्ञापन

जैसी संगत वैसी रंगत

Manmohan Singh

Mere Alfaz
                                    
                                                                        
                            आदत बिगड़ा बच्चे का
        
                                                    
                            
आदत बिगड़ा बच्चे का
ना मानता कोई बात है
ये मत पूछों कैसे हुआ
संस्कार(संगत) की ये बात है

जैसी संगत वैसी रंगत
ये प्रकृति का सार हैं
जैसी संगत वैसी रंगत
ये प्रकृति का सार हैं

आदत बिगड़ा बच्चे का
ना मानता कोई बात है
ये मत पूछों कैसे हुआ
संस्कार(संगत) की ये बात है

पढ़ लिखकर बच्चा इंसान कहाए
हर मां बाप का आश है
पढ़ लिखकर बच्चा इंसान कहाए
हर मां बाप का आश है
पर बच्चा बात न माने
करता मां बाप का अपमान है
कुल की मर्यादा को ये करते तार तार हैं

आदत बिगड़ा बच्चे का
ना मानता कोई बात है
ये मत पूछों कैसे हुआ
संस्कार (संगत) की ये बात है

जैसी संगत वैसी रंगत
ये प्रकृति का सार हैं
जैसी संगत वैसी रंगत
ये प्रकृति का सार हैं

आदत बिगड़ा बच्चे का
ना मानता कोई बात है
ये मत पूछों कैसे हुआ
संस्कार (संगत) की ये बात है।।।
3 वर्ष पहले
विज्ञापन

विशेष

आज के शीर्ष कवि Show all

Anil Kumar

4215 कविताएं

View Profile

Priyanshu Saini

1 कविता

View Profile

N manglam

371 कविताएं

View Profile

Gurdeep Singh

143 कविताएं

View Profile