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विचारों की शुभता

Manjula Chaudhary

Mere Alfaz
                                    
                                                                        
                            जब आसान ना हो राह चुनना
        
                                                    
                            
जब शब्द ढूंढने लगे कोना
जब मस्तिष्क विस्मृत कर दे
जब हृदय का मंद हो स्पंदन
तब सुदूर आती ध्वनि पर
केन्द्रित करना चाहिए ध्यान
वहीं पर रोक देना चाहिए
मन की उड़ान ,क्योंकि आवश्यक है
आपसी तालमेल।
मस्तिष्क और हृदय के
मंथन से होता है नवीन विचारों
का उदय
और तब .. शब्द आसपास
विचरने लगते हैं,हृदय उल्लसित हो
बुनने लगता है, भावों की चारपाई
जहाँ मस्तिष्क आनन्दित होकर
एक –एक शब्द को वाक्य में
सहेज कर,बिखरे कलपुर्जों में
स्थापित कर सके तारतम्यता।
क्योंकि भावों एवं विचारों की
शुभता और सौम्यता रखती है
सम्पूर्ण दिग दिगंत को सुवासित
करने की अपार क्षमता।
-मंजुला चौधरी
 
2 घंटे पहले
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