विज्ञापन

प्रेम की अविरल धारा में

Manju Sharma

Mere Alfaz
                                    
                                                                        
                            प्रेम की अविरल धारा में
        
                                                    
                            
अर्पण जीवन सारा न कर
प्रेम निस्वार्थ है जग कहता है
कैसे कहूँ विश्वास न कर ।
-मं शर्मा
एक दिन पहले
विज्ञापन

विशेष

आज के शीर्ष कवि Show all

Dn Chaubey

7473 कविताएं

View Profile