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सुनहरे दिनों के महंगे खजाने।

Manju Sharma

Mere Alfaz
                                    
                                                                        
                            रो रो कर गुजारते कभी
        
                                                    
                            
मुस्कान से छिपाया करते हैं
जागती आँखों के सपने को
रात भर जगाया करता हैं

बीते पलों के गुजरे ज़माने
छोटी बातों के बड़े फसाने
कौन भूलना चाहेगा भला
सुनहरे दिनों के महंगे खजाने।
-मं शर्मा 
एक महीने पहले
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