रो रो कर गुजारते कभी
मुस्कान से छिपाया करते हैं
जागती आँखों के सपने को
रात भर जगाया करता हैं
बीते पलों के गुजरे ज़माने
छोटी बातों के बड़े फसाने
कौन भूलना चाहेगा भला
सुनहरे दिनों के महंगे खजाने।
-मं शर्मा
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