विज्ञापन

चाँद की चाँदनी

Manju Sharma

Mere Alfaz
                                    
                                                                        
                            हर घर के आँगन में
        
                                                    
                            
हर छत की मुँडेर पर
चाँदनी बिखेरता चाँद
दूर से इतराता रहा

चाहा था सबने मगर
किसी का न हो सका
सबका उसे होना था
थोड़ा थोड़ा बँटता रहा।
-मं शर्मा 
19 घंटे पहले
विज्ञापन

विशेष

आज के शीर्ष कवि Show all

Vijay BindaasRaja

192 कविताएं

View Profile

Updesh Kumar

12711 कविताएं

View Profile

Ankit Kumar

10438 कविताएं

View Profile