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रिश्तों की नजाकत

Manish Pandey

Mere Alfaz
                                    
                                                                        
                            निभ जातें हैं वो रिश्ते, जिनमें दूरी होती है
        
                                                    
                            
साथ छोड़ देना भी, मजबूरी होती है

फासले से ही कायम है रिश्ते,
रिश्तों में फासला भी जरूरी होती है

किसी की याद में आंखें नम हो जाएं
वो आसूं नहीं, श्रद्धा सबुरी होती है

नज़र चुराने लगे घर रिश्तों में कोई
फिर साथ रहना, बलजोरी होती है

चंद लम्हों के साथ में, कोई बेखूद कर दें
मोहब्बत नहीं जनाब, ये तो चोरी होती है

बेपरवाह, बेमुरव्वत से रिश्ता कायम रखना
मुहब्बत नहीं, जी हूजुरी होती है।
3 वर्ष पहले
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