आज भी सांसों से आती है,
सुगंध तुम्हारी कस्तूरी,
प्रीत हमारी रह गई अधूरी।
याचना करते रहे उमर भर,
नही मिली तेरी मंजूरी,
प्रीत हमारी रह गई अधूरी।
ढूंढते तुमको नयना हर पल,
अस्रुपूरित लोचन में भरे जल,
भाव हमारे स्रधा सबूरी,
प्रीत हमारी रह गई अधूरी।
हृदय में बसेगा न कोई दूजा,
तुमको ही बस हमने पूजा,
लाखों जतन किए हमने पर,
मिटी न थोड़ी सी वो दूरी,
प्रीत हमारी रह गई अधूरी