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पितृ महिमा

Manish Pandey

Mere Alfaz
                                    
                                                                        
                            जो आपके फटे हाल जीवन को,
        
                                                    
                            
एक एक कर सीता,
जिसका यौवन जिम्मेदारीयां निभाने में बीता,
जो हरदम हारा, कभी ना जीता,
वो है सिर्फ आपका पिता।

मूक पिता का प्यार,
कभी ना करता है इजहार,
भले हो कितना भी लाचार,
चाहे दुखो की पड़ी हो मार,
जब भी देखो हंसकर कहता,
सब कुछ ठीक है यार।

चिंता फिकर ने डूबा रहता,
फिर भी कभी ना आहें भरता,
फटा हो पैर, फटी हो धोती,
परवाह कभी नही वो करता,

बचपन में खिलौना है पिता,
यौवन का है यार,
इहलोक का अवलंबन है,
जीवन का है सार।

पिता की आंख में आए न आंसू,
सदा ये रखना याद,
पितृ आशीष से रहोगे फिर तुम,
जीवन भर आबाद।
2 वर्ष पहले
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