क्या बताएं, कैसे हासिल होती है ये नींद,
रात गुजर जाती है करवट बदलने में,
बैठ कर हाथ मलने में,
कभी लेटते, कभी हाथों से आंख सेकते,
सारी ये कसरत होती है, नींद लाने के लिए,
और जनाब नींद आती है, गोया जाने के लिए।
कभी हाथों से सर थपथपाते हैं,
कभी कोई शेर गुनगुनाते हैं
कभी किताबों में आंखे जमाते हैं,
कभी कोई पसंदीदा चीज खाते हैं,
जब प्रयास विहीन हो कर, इंद्रियां निढाल हो जाती हैं,
तभी कहीं जा के ये नींद आती है।